भारत की इलेक्ट्रिक व्हीकल आपूर्ति शृंखलाओं को सुदृढ़ करने की आवश्यकता

पाठ्यक्रम: जीएस-3/पर्यावरण

सन्दर्भ

  • भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को अपनाने की गति बढ़ने के साथ बाहरी प्रभावों (shocks) के प्रति संवेदनशीलता को कम करने पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।

परिचय

  • वित्तीय वर्ष 2026 में लगभग 25 लाख वाहनों की बिक्री हुई, जो वित्तीय वर्ष 2025 की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि है।
  • जैसे-जैसे यह क्षेत्र विस्तार कर रहा है, भारत आयातित जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम कर रहा है, लेकिन साथ ही आयातित लिथियम-आयन बैटरियों पर उसकी निर्भरता बढ़ती जा रही है।
  • अब इलेक्ट्रिक व्हीकल क्षेत्र की वृद्धि का मूल्यांकन केवल बिक्री के आधार पर नहीं, बल्कि तीन अतिरिक्त मानकों पर भी किया जाना चाहिए— आपूर्ति शृंखला की सुदृढ़ता,सामरिक स्वायत्तता तथा दीर्घकालिक स्थिरता।

इलेक्ट्रिक व्हीकल क्या हैं? 

  • इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) एक विद्युत मोटर पर संचालित होते हैं, न कि आंतरिक दहन इंजन पर, जो ईंधन और गैसों के मिश्रण को जलाकर शक्ति उत्पन्न करता है।
  • इलेक्ट्रिक व्हीकल बड़े पुनर्भरणीय बैटरी पैकों में विद्युत ऊर्जा संग्रहित करते हैं तथा उन्हें पुनर्भरण के लिए बाहरी विद्युत स्रोत से जोड़ा जाता है।
  • इसलिए ऐसे व्हीकल को बढ़ते प्रदूषण, वैश्विक तापवृद्धि, प्राकृतिक संसाधनों के क्षय आदि समस्याओं के समाधान हेतु वर्तमान पीढ़ी के वाहनों के संभावित विकल्प के रूप में देखा जाता है।

भारत में घरेलू सेल विनिर्माण

  • भारत का घरेलू बैटरी सेल विनिर्माण अभी भी उस स्तर से काफी नीचे है जो आयात निर्भरता को सार्थक रूप से कम कर सके।
  • उन्नत रसायन सेल बैटरी उत्पादन-संबद्ध प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत 40 गीगावाट-घंटा क्षमता आवंटित की गई है, किन्तु अब तक केवल लगभग 1 गीगावाट-घंटा क्षमता ही स्थापित हो पाई है।
  • इस बीच, भारत में बेचे जा रहे यात्री इलेक्ट्रिक व्हीकल 14 वैश्विक निर्माताओं से बैटरियाँ प्राप्त कर रहे हैं तथा वर्ष 2025 में 7,987 मेगावाट-घंटा बैटरियों का आयात किया गया।
  • इसका एक बड़ा हिस्सा चीनी निर्माताओं से आया, जो दर्शाता है कि इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की बढ़ती बिक्री का चीन से बढ़ते आयात के साथ घनिष्ठ संबंध है।

मुख्य चिंताएँ 

एक ही देश पर निर्भरता

  • बैटरी आपूर्ति तेजी से एक ऐसे एकल-देशीय तंत्र पर निर्भर होती जा रही है जो भारत के नियंत्रण से बाहर की नीतियों, भू-राजनीतिक परिस्थितियों और औद्योगिक रणनीतियों से प्रभावित होता है।
  • चीन में कई घटनाक्रम मूल्य निर्धारण और उपलब्धता को प्रभावित कर रहे हैं, जैसे— प्रौद्योगिकी पर कड़े प्रतिबंध,घरेलू मांग को प्राथमिकता,बैटरी निर्यात पर मूल्यवर्धित कर छूट की समाप्ति।

भू-राजनीतिक परिस्थितियाँ

  • पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष ने कच्चे माल की लागत, चीन में विनिर्माण व्यय तथा परिवहन एवं जोखिम प्रीमियम को बढ़ाकर दबाव और अधिक बढ़ा दिया है।

भारतीय बाजार पर प्रभाव

  • भारत जैसे अत्यधिक मूल्य-संवेदनशील बाजार में यह स्थिति इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को केवल उच्च-आय वर्ग तक सीमित कर सकती है और राष्ट्रीय अंगीकरण लक्ष्यों को जोखिम में डाल सकती है।
  • यदि यह स्थिति बनी रहती है और मूल उपकरण निर्माता (OEMs)बढ़ी हुई लागत उपभोक्ताओं पर डालने के लिए विवश होते हैं।

सरकारी पहलें

भारत में वाहन एवं वाहन अवयव उद्योग के लिए उत्पादन-संबद्ध प्रोत्साहन(PLI) योजना(PLI-Auto):

  • वर्ष 2021 में प्रारम्भ की गई इस योजना का उद्देश्य उन्नत वाहन प्रौद्योगिकियों के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना है। प्रोत्साहन प्राप्त करने के लिए कंपनियों को कम-से-कम 50 प्रतिशत घरेलू मूल्य संवर्धन सुनिश्चित करना आवश्यक है।

भारत में विद्युत यात्री कारों के विनिर्माण को प्रोत्साहन योजना (SPMEPCI), 2024

  • वैश्विक वाहन निर्माताओं को निवेश हेतु आकर्षित करने के लिए इस योजना के अंतर्गत स्वीकृत आवेदकों को पाँच वर्षों तक न्यूनतम 35,000 अमेरिकी डॉलर लागत, बीमा एवं मालभाड़ा मूल्य वाली पूर्ण निर्मित विद्युत चार-पहिया गाड़ियों के आयात पर केवल 15 प्रतिशत सीमा शुल्क की सुविधा दी जाती है।

उन्नत रसायन सेल उत्पादन-संबद्ध प्रोत्साहन योजना(ACC):

  • इसे वर्ष 2021 में 18,100 करोड़ रुपये के बजटीय प्रावधान के साथ स्वीकृत किया गया था।
  • इसका उद्देश्य देश में 50 गीगावाट-घंटा उन्नत रसायन सेल बैटरियों के लिए प्रतिस्पर्धी घरेलू विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करना है।

रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट स्कीम(REPM)

  • इलेक्ट्रिक व्हीकल मोटरों में प्रयुक्त दुर्लभ मृदा परमानेंट मैग्नेट्स के घरेलू उत्पादन को विकसित करने के लिए यह योजना प्रारम्भ की गई है।
  • यह महत्वपूर्ण खनिजों और सामरिक अवयवों के आयात पर निर्भरता कम करती है।
  • साथ ही विद्युत गतिशीलता के लिए प्रारम्भिकआपूर्ति शृंखलाओं कोसुदृढ़ बनाती है।

आगे की राह

  • भारतीय निर्माताओं को सोडियम-आयन बैटरियों सहित उभरती बैटरी रसायन प्रौद्योगिकियों पर आधारित वाहनों का प्रकार-परीक्षण प्रारम्भ करना चाहिए।
  • यद्यपि सोडियम-आयन बैटरियाँ अभी सभी उपयोगों में लिथियम-आयन का पूर्ण विकल्प नहीं हैं, फिर भी घरेलू उत्पादन बढ़ने के साथ वे एक महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में कार्य कर सकती हैं।
  • भारत को खनिज, विनिर्माण, प्रौद्योगिकी तथा मानकों को समाहित करने वाले विश्वसनीय साझेदारों के साथ एक संरचित विद्युत वाहन आपूर्ति शृंखला गठबंधन विकसित करना चाहिए।
  • ऐसा गठबंधन विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में जोखिम का वितरण करेगा, घरेलू क्षमताओं को मजबूत बनाएगा तथा किसी एक बाहरी व्यवधान को भारत के विद्युतीकरण कार्यक्रम को बाधित करने से रोकेगा।

निष्कर्ष

  • भारत ने यह सिद्ध कर दिया है कि वह स्वच्छ गतिशीलता के लिए मांग उत्पन्न कर सकता है। अब अगली चुनौती यह है कि क्या वह इस मांग को बनाए रखने के लिए आवश्यक औद्योगिक क्षमता विकसित कर सकता है, बिना किसी एक बाहरी बाधा पर निर्भर हुए।
  • लक्ष्य केवल तेजी से विद्युतीकरण करना नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसा विद्युतीकरण करना चाहिए जो बुद्धिमत्तापूर्ण, सुरक्षित और भारत की दीर्घकालिक सामरिक तथा आर्थिक स्वायत्तता को सुदृढ़ करने वाला हो।

स्रोत: TH

 

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